Thursday, 1 August 2013

इलाहाबाद में डूबा एसटीपी

लखनऊ। सावन में इलाहाबाद में गंगा व यमुना ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। गंगा के कहर का शिकार नदी का तटीय क्षेत्र तो बना ही है, लेकिन तेज बहाव के कारण पानी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), राजापुर में घुस गया। जिससे एसटीपी में 7 मीटर की दरार पड़ गई।
एसटीपी को जोड़ने वाला बांध भी पानी में डूब गया है। पानी घुसने से एसटीपी के सभी उपकरण बंद हो गए और काम कर रहे दर्जनों कर्मचारियों को नाव के सहारे बाहर निकाला गया। गंगा में लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण 60 एमएलडी क्षमता वाले इस एसटीपी पर संकट के बादल गंगा का पानी बढ़ते ही मंडराने लगे थे। फिर भी कर्मचारियों ने काम किया। कल सुबह मेंहदौरी कछार से एसटीपी को जोड़ने वाले बांध के उस हिस्से से गंगा का पानी अंदर प्रवेश कर गया,जहां बांध की ऊंचाई कम है। इससे एसटीपी के उपकरण बंद हो गए और काम कर रहे कर्मचारी पानी में फंस गए। मामले की जानकारी पर कंपनी के अधिकारी मौके पर पहुंच गए और नाव की मदद से फंसे कर्मचारियों को बाहर निकाला गया। कर्मचारियों को बचाने के बाद अफसर सभी उपकरणों को बचाने में लगे जिससे कि संयंत्र का संचालन होता है। बांध का निर्माण 10.30 मीटर होना है लेकिन अभी 5 से 9 मीटर तक निर्माण हो सका है।
उल्लेखनीय है कुंभ मेले के दौरान 30 एमएलडी पानी का ट्रीटमेंट कंपनी ने शुरू करा दिया था,जबकि 30 एमएलडी शोधन के लिए निर्माण कार्य चल रहा है। नाम न छापने की शर्त पर एक अफसर ने बताया कि नुकसान का आकलन पानी निकलने के बाद ही हो सकेगा,लेकिन पानी घुसने से खराब होने वाले यंत्रों एवं बांध के क्षतिग्रस्त होने से पुनरोद्धार पर आने वाला खर्च 40-50 करोड़ में अनुमानित है। इसके पहले 2011-12 में भी एसटीपी डूब गया था। जलस्तर वृद्धि की रफ्तार यही रही तो ममफोर्डगंज एसटीपी का गेट भी बंद करना पड़ सकता है।
उधर, सलोरी एसटीपी में दरार को पाटने के लिए जलनिगम ने सिंचाई विभाग से मदद मांगी है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता जेपी वर्मा ने बताया कि दरार को बोल्डर एवं बालू की बोरी से भरने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
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गलत जगह बना एसटीपी : कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के बाद भी गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने राजापुर में एसटीपी निर्माण की मंजूरी दी। निर्माण के समय सिंचाई विभाग ने इस पर आपत्ति भी की थी, लेकिन अफसरों ने उस पर ध्यान नहीं दिया। एसटीपी पर बाढ़ का संकट बार-बार आएगा।
परियोजना प्रबंधक गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई, जेपी मणि ने कहा कि एसटीपी के पास बांध बनाया जाना था लेकिन ठेकेदार ने शरारत की। उसने काम पूरा नहीं किया। जनवरी के बाद से कंपनी का काम भी बहुत धीमा चल रहा है। इसके लिए उसे नोटिस भी दी गई है, कि सितंबर तक काम में प्रगति नहीं आई तो दूसरे को जिम्मेदारी दे दी जाएगी। बांध बनने पर एसटीपी पर बाढ़ का कोई खतरा नहीं रहेगा।

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