Thursday, 1 August 2013

भाजपा के बाबत बोले नीतीश, औकात में ला देंगे

पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को बिहार विधानसभा में विपक्ष (खासकर भाजपा) पर खूब बरसे। बोले-'हमारी बात सुनने का धैर्य नहीं है। तितकी लग रही है। जब हमारे साथ थे, तब तितकी नहीं लगती थी। औकात में ला देंगे। फिर से वहीं जाएंगे जहां वे थे। पुनर्मूषको भव की स्थिति होगी। आश्चर्य है, हमसे इतना भयभीत क्यों हैं? जब अपनी बात कहते हैं तब हमलोग सुनते हैं। जब हमलोग कहते हैं तो भाग खड़े होते हैं। हंगामा खड़ा करते हैं।' मुख्यमंत्री, सदन में बोधगया मंदिर विधेयक-2013 पर अपनी बात रख रहे थे। असल में जब वे बोलने को खड़े हुए, भाजपा सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चले गए।
मुख्यमंत्री ने कहा-'मेरे नाम पर जनता से वोट मांगते थे और अब कुतर्क कर रहे हैं। उन्माद की राजनीति करने वाले फिर से उसी दिशा में बढ़ना चाहते हैं। मगर यह नहीं भूलें कि जनता उनके बहकावे में नहीं आ सकती बल्कि माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले को धर्मनिरपेक्ष जनता मुंहतोड़ जवाब देगी।'
उन्होंने विपक्ष के बातों को हल्के में लेते हुए कहा कि बात का बतंगड़ बनाना चाहते हैं। हम विपक्ष का कुतर्क सुनते रहें। मगर हमारी तर्कसंगत बातों को सुनने का उनमें धैर्य ही नहीं है। इसलिए उत्पात खड़ा करते हैं। इनकी मंशा गड़बड़ी की पैदा करने की रहती है। इससे पता चलता है कि इनसे पिंड छुड़ाने का हमारा फैसला सही था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विधेयक के नाम पर जो माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है, उसे किसी कीमत पर सफल होने नहीं दिया जाएगा। राजद के अब्दुल बारी सिद्दिकी ने चुटकी ली। सिद्दिकी बोले-उन्हें (भाजपा) इतना मजबूत तो आपने ने ही किया। आडवाणी जी के 'पीएम' बनने पर 'स्पेस' खाली छोड़ रखा है। लोकसभा चुनाव के बाद आप कांग्रेस में जाएंगे या भाजपा में? नीतीश ने कहा-'आप तो ऐसे नहीं थे। आपको भी समझने में चूक हुई। इतने दिनों से आपसे बहुत उम्मीद किए हूं लेकिन हमें निराश कर रहे हैं।' सदन में ठहाका लगा। मुख्यमंत्री बोले-अब हमारा उनसे (भाजपा) मिलना नामुमकिन है। जनता ने विपक्ष में बैठने का अधिकार सिद्दीकी जी को दिया था। मगर कभी जो मेरे (सुशील कुमार मोदी मोदी) साथ बैठते थे अब दूसरे सदन (विधान परिषद) में जनादेश का उल्लंघन कर विपक्ष की कुर्सी को हथिया लिये हैं। यहां भी सदन में वे (नंदकिशोर यादव) छड़प कर विपक्ष की कुर्सी पर बैठ गए हैं और सिद्दीकी जी को किनारे कर दिए हैं।'
सर्वोच्च न्यायालय में सरकार ने दाखिल किया है शपथ पत्र : मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि विधेयक का उद्देश्य बहुत ही पवित्र है। आज जो परिस्थितियां हैं उसके मद्देनजर यह संशोधन विधेयक लाया गया है। इसमें केवल यह प्रावधान किया गया है कि मंदिर प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष जिलाधिकारी ही होंगे। पूर्व के प्रावधान यह है कि डीएम कमेटी के अध्यक्ष होंगे और वह हिन्दू नहीं होगा तब गैरहिन्दू होगा। सदन में संशोधन विधेयक लाने से पहले राज्य सरकार की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में शपथ पत्र भी दाखिल किया गया है। ब्लास्ट की घटना से यह विधेयक का कोई लेना-देना नहीं है। अप्रैल में ही संशोधन विधेयक लाने का विचार था। 1949 में महाबोधि मंदिर संबंधी जो कानून बना है वह बिल्कुल सहीं है। उसी कानून में मंदिर प्रबंधन कमेटी बनाने का अधिकार राज्य सरकार को दिया गया है।

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