नई दिल्ली। नोएडा की निलंबित एसडीएम और आइएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को लेकर चल रही बयानबाजी पर सपा के नेतागण तमाम हदें पार कर रहे हैं। जहां एक ओर इस निलंबन के लिए जिम्मेदार समझे जा रहे नोएडा के ताकतवर सपा नेता नरेंद्र भाटी ने दुर्गा शक्ति को बेहूदा करार दिया, वहीं दूसरी ओर सपा के प्रदेश महासचिव डॉ. चंद्र प्रकाश राय ने प्रशासनिक अधिकारियों पर अभद्र टिप्पणी की है। डॉ. राय ने कहा कि अधिकारियों की पूंछ सीधी होने को तैयार नहीं होती है। उनके इस अमर्यादित बयान की घोर निंदा करते हुए बीजेपी की प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने जागरण डॉट कॉम से बात करते हुए टिप्पणी की है कि इस बयान से स्पष्ट है कि सत्ता में रहते हुए सपा नेताओं के दिमाग वाकई टेढ़े हो गए हैं।
वहीं आइएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को महज 41 मिनट में निलंबित करवाने की बात भरी सभा में कहने वाले यूपी एग्रो के चेयरमेन नरेंद्र भाटी अब अपनी बात से पलट गए हैं। भाटी का कहना है कि उनका बयान तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। गौरतलब है कि गुरुवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बात कर उन्होंने ही महज 41 मिनट में आइएएस अधिकारी दुर्गा का निलंबन करवाया था।
बादलपुर में हुई एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने यहां तक कहा कि जिस औरत ने इतनी बेहूदगी दिखाई वह उसे 40 मिनट नहीं झेल पाई। महज 41 मिनट में उसके निलंबन का आदेश लखनऊ से पास होकर जिला कलेक्टर के पास आ गया और हुक्म की तामील भी हो गई।
दुर्गा का निलंबन सही: अखिलेश
भाटी ने इसको अपनी और लोकतंत्र की ताकत बताया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए पहले साढ़े दस बजे उन्होंने सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव से बात की। उसके बाद सूबे के मुख्यमंत्री से बात की और महज 41 मिनट में दुर्गा को निलंबित करवा दिया।
डीएम की रिपोर्ट से खुली यूपी सरकार की पोल
दुर्गा पर जिस मस्जिद की दीवार को गिराने का आरोप लगाते हुए सांप्रदायिक सदभाव बिगाड़ने की कोशिश करार दिया गया है उस मस्जिद का शिलान्यास नरेंद्र भाटी ने ही किया था। हालांकि अब वह इस बात को झूठ बता रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने इस मस्जिद के लिए केवल सहयोग राशि ही दी थी, शिलान्यास नहीं किया था।
यूपी सरकार के लिए गले की हड्डी बना दुर्गा का निलंबन
दुर्गा के निलंबन के बाद अब इस पर सियासत भी गरमा गई है। सरकार पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि उन्होंने अवैध खनन माफिया को बचाने के लिए ही दुर्गा का निलंबन किया है। हालांकि मुख्यमंत्री ऐसा नहीं मानते हैं। गौरतलब है कि दुर्गा ने जिले में अवैध खनन करने वालों का काफी सामान जब्त कर उनके खिलाफ मामला दर्ज कराने के आदेश दिए थे।
वहीं आइएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को महज 41 मिनट में निलंबित करवाने की बात भरी सभा में कहने वाले यूपी एग्रो के चेयरमेन नरेंद्र भाटी अब अपनी बात से पलट गए हैं। भाटी का कहना है कि उनका बयान तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। गौरतलब है कि गुरुवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बात कर उन्होंने ही महज 41 मिनट में आइएएस अधिकारी दुर्गा का निलंबन करवाया था।
बादलपुर में हुई एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने यहां तक कहा कि जिस औरत ने इतनी बेहूदगी दिखाई वह उसे 40 मिनट नहीं झेल पाई। महज 41 मिनट में उसके निलंबन का आदेश लखनऊ से पास होकर जिला कलेक्टर के पास आ गया और हुक्म की तामील भी हो गई।
दुर्गा का निलंबन सही: अखिलेश
भाटी ने इसको अपनी और लोकतंत्र की ताकत बताया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए पहले साढ़े दस बजे उन्होंने सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव से बात की। उसके बाद सूबे के मुख्यमंत्री से बात की और महज 41 मिनट में दुर्गा को निलंबित करवा दिया।
डीएम की रिपोर्ट से खुली यूपी सरकार की पोल
दुर्गा पर जिस मस्जिद की दीवार को गिराने का आरोप लगाते हुए सांप्रदायिक सदभाव बिगाड़ने की कोशिश करार दिया गया है उस मस्जिद का शिलान्यास नरेंद्र भाटी ने ही किया था। हालांकि अब वह इस बात को झूठ बता रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने इस मस्जिद के लिए केवल सहयोग राशि ही दी थी, शिलान्यास नहीं किया था।
यूपी सरकार के लिए गले की हड्डी बना दुर्गा का निलंबन
दुर्गा के निलंबन के बाद अब इस पर सियासत भी गरमा गई है। सरकार पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि उन्होंने अवैध खनन माफिया को बचाने के लिए ही दुर्गा का निलंबन किया है। हालांकि मुख्यमंत्री ऐसा नहीं मानते हैं। गौरतलब है कि दुर्गा ने जिले में अवैध खनन करने वालों का काफी सामान जब्त कर उनके खिलाफ मामला दर्ज कराने के आदेश दिए थे।

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